Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 11.22.14: देखो, मेरी कन्या दुशाला, जो अभी भी बालिका है, किस प्रकार दुःखी होकर विलाप कर रही है और पाण्डवों को कोसती हुई अपनी छाती पीट रही है!॥14॥   |   mahabharat अध्याय 11.22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 22: अपनी-अपनी स्त्रियोंसे घिरे हुए अवन्ती-नरेश और जयद्रथको देखकर तथा दु:शलापर दृष्टिपात करके गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  11.22.14 
सैषा मम सुता बाला विलपन्ती च दु:खिता।
आत्मना हन्ति चात्मानमाक्रोशन्ती च पाण्डवान्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
देखो, मेरी कन्या दुशाला, जो अभी भी बालिका है, किस प्रकार दुःखी होकर विलाप कर रही है और पाण्डवों को कोसती हुई अपनी छाती पीट रही है!॥14॥
 
Look, how my daughter Dushala, who is still a child, is wailing in sorrow and beating her own chest while cursing the Pandavas! ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)