श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 20: गान्धारीद्वारा श्रीकृष्णके प्रति उत्तरा और विराटकुलकी स्त्रियोंके शोक एवं विलापका वर्णन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  11.20.29 
इत्युक्तवचनामेतामपकर्षन्ति दु:खिताम्।
उत्तरां मोघसंकल्पां मत्स्यराजकुलस्त्रिय:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर शोक में डूबी हुई तथा जिसका सारा संकल्प नष्ट हो गया है, उत्तरा को मत्स्यराज विराट की स्त्रियाँ घसीटकर ले जा रही हैं।
 
Having said such things, Uttarā, who is drowned in sorrow and whose all resolve has been dashed, is being dragged away by the women of the clan of the Matsyaraj Virat.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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