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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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अध्याय 20: गान्धारीद्वारा श्रीकृष्णके प्रति उत्तरा और विराटकुलकी स्त्रियोंके शोक एवं विलापका वर्णन
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श्लोक 26
श्लोक
11.20.26
नूनमप्सरसां स्वर्गे मनांसि प्रमथिष्यसि।
परमेण च रूपेण गिरा च स्मितपूर्वया॥ २६॥
अनुवाद
"तुम अवश्य स्वर्ग जाओगी और वहाँ अपने सुन्दर रूप, मधुर वाणी तथा मृदु मुस्कान से अप्सराओं के हृदय को मथ डालोगी।" 26.
"You will surely go to heaven and churn the hearts of the nymphs there with your beautiful form and sweet voice accompanied by a gentle smile." 26.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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