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श्लोक 11.2.7  |
न शोचन् मृतमन्वेति न शोचन् म्रियते नर:।
एवं सांसिद्धिके लोके किमर्थमनुशोचसि॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| शोक करने वाला मनुष्य न तो मरने वाले के साथ जा सकता है और न स्वयं मर सकता है। जब संसार की यही स्वाभाविक स्थिति है, तो फिर तुम शोक क्यों कर रहे हो?॥7॥ |
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| A person who is mourning can neither go with the dying person nor can he die. When this is the natural state of the world, then why are you mourning?॥ 7॥ |
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