श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  11.2.7 
न शोचन् मृतमन्वेति न शोचन् म्रियते नर:।
एवं सांसिद्धिके लोके किमर्थमनुशोचसि॥ ७॥
 
 
अनुवाद
शोक करने वाला मनुष्य न तो मरने वाले के साथ जा सकता है और न स्वयं मर सकता है। जब संसार की यही स्वाभाविक स्थिति है, तो फिर तुम शोक क्यों कर रहे हो?॥7॥
 
A person who is mourning can neither go with the dying person nor can he die. When this is the natural state of the world, then why are you mourning?॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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