श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  11.2.4 
यदा शूरं च भीरुं च यम: कर्षति भारत।
तत् किं न योत्स्यन्ति हि ते क्षत्रिया: क्षत्रियर्षभ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! क्षत्रियशिरोमणे! जब यमराज वीर और कायर दोनों को घसीटकर ले जाते हैं, तब वे क्षत्रिय क्यों नहीं लड़ते?
 
Bharatnandan! Kshatriyashiromane! When Yamraj drags both the brave and the coward away, then why don't those Kshatriyas fight! 4॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd