श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  11.2.36 
शुभेन कर्मणा सौख्यं दु:खं पापेन कर्मणा।
कृतं भवति सर्वत्र नाकृतं विद्यते क्वचित्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
शुभ कर्म सुख लाते हैं और पाप कर्म दुःख। सर्वत्र अपने ही कर्मों का फल मिलता है, उन कर्मों का नहीं जो कहीं नहीं किये जाते ॥36॥
 
Good deeds bring happiness and sinful deeds bring sorrow. Everywhere one gets the fruits of one's own deeds and not of those which are not done anywhere. ॥ 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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