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mahabharat 11.2.34: मनुष्य जिस भी शरीर से जो भी कर्म करता है, अगले जन्म में उसी कर्म का फल भोगता है ॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 11.2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  11.2.34 
येन येन शरीरेण यद्यत् कर्म करोति य:।
तेन तेन शरीरेण तत्फलं समुपाश्नुते॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य जिस भी शरीर से जो भी कर्म करता है, अगले जन्म में उसी कर्म का फल भोगता है ॥ 34॥
 
Whatever action a person performs with whatever body, he reaps the fruits of the same action in his next birth. ॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)