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श्लोक 11.2.33  |
यस्यां यस्यामवस्थायां यत् करोति शुभाशुभम्।
तस्यां तस्यामवस्थायां तत्फलं समुपाश्नुते॥ ३३॥ |
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| अनुवाद |
| मनुष्य जिस भी अवस्था में जो भी अच्छा या बुरा कर्म करता है, उसका फल उसे उसी अवस्था में प्राप्त होता है ॥33॥ |
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| Whatever good or bad deed a man performs in whatever state, he receives its fruits in the same state. ॥ 33॥ |
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