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mahabharat 11.2.30-31h: असंतुष्ट मनुष्य धन के विभिन्न पहलुओं से मोहित हो जाते हैं; किन्तु विद्वान् मनुष्य सदैव संतुष्ट रहते हैं।   |   mahabharat अध्याय 11.2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  11.2.30-31h 
अन्यामन्यां धनावस्थां प्राप्य वैशेषिकीं नरा:॥ ३०॥
असंतुष्टा: प्रमुह्यन्ति संतोषं यान्ति पण्डिता:।
 
 
अनुवाद
असंतुष्ट मनुष्य धन के विभिन्न पहलुओं से मोहित हो जाते हैं; किन्तु विद्वान् मनुष्य सदैव संतुष्ट रहते हैं।
 
Discontented men become tempted by the various aspects of wealth; but learned men always remain satisfied. 30 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)