श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  11.2.3 
सर्वे क्षयान्ता निचया: पतनान्ता: समुच्छ्रया:।
संयोगा विप्रयोगान्ता मरणान्तं च जीवितम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
समस्त संचय का अंत क्षय में होता है। भौतिक उन्नति का अंत पतन में होता है। समस्त मिलन का अंत वियोग में होता है। इसी प्रकार सम्पूर्ण जीवन का अंत मृत्यु में होता है॥3॥
 
All accumulations end in their decay. Material progress ends in downfall. All unions end in separation. Similarly, the entire life ends in death.॥ 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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