श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  11.2.26 
न जानपदिकं दु:खमेक: शोचितुमर्हसि।
अप्यभावेन युज्येत तच्चास्य न निवर्तते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
सम्पूर्ण राष्ट्र पर जो दुःख आया है, उसके लिए केवल तुम्हारा शोक करना उचित नहीं है। यदि कोई शोक करते हुए मर भी जाए, तो भी उसका शोक दूर नहीं होता॥ 26॥
 
It is not appropriate for you alone to grieve for the misery that has befallen the entire nation. Even if someone dies while grieving, his grief does not go away.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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