श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  11.2.24 
काल: पचति भूतानि काल: संहरते प्रजा:।
काल: सुप्तेषु जागर्ति कालो हि दुरतिक्रम:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
काल ही है जो जीवों को खाता है, काल ही है जो मनुष्यों को मारता है और काल ही है जो सबके सो जाने पर भी जागता रहता है। काल का उल्लंघन करना बड़ा कठिन है॥ 24॥
 
It is time that cooks the living beings, it is time that kills the people and it is time that remains awake even when everyone is asleep. It is very difficult to violate time.॥ 24॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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