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mahabharat 11.2.21: इस संसार में हमने बार-बार जन्म लिया है और हजारों माता-पिता तथा सैकड़ों स्त्री-पुत्रों का सुख भोगा है; परंतु आज वे किसके हैं अथवा हम उनमें से किसके हैं?॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 11.2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  11.2.21 
मातापितृसहस्राणि पुत्रदारशतानि च।
संसारेष्वनुभूतानि कस्य ते कस्य वा वयम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में हमने बार-बार जन्म लिया है और हजारों माता-पिता तथा सैकड़ों स्त्री-पुत्रों का सुख भोगा है; परंतु आज वे किसके हैं अथवा हम उनमें से किसके हैं?॥ 21॥
 
We have been born again and again in this world and have experienced the happiness of thousands of parents and hundreds of wives and children; but today whose do they belong to or whose of them do we belong to?॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)