श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 2: विदुरजीका राजा धृतराष्ट्रको समझाकर उनको शोकका त्याग करनेके लिये कहना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  11.2.14 
हतोऽपि लभते स्वर्गं हत्वा च लभते यश:।
उभयं नो बहुगुणं नास्ति निष्फलता रणे॥ १४॥
 
 
अनुवाद
युद्ध में मारा गया मनुष्य स्वर्ग को प्राप्त होता है और शत्रु को मारने वाला यश पाता है। ये दोनों ही स्थितियाँ हमारे लिए बहुत कल्याणकारी हैं। युद्ध में कभी असफलता नहीं होती। ॥14॥
 
One who is killed in a war attains heaven and one who kills the enemy gets fame. Both these situations are very beneficial for us. There is no failure in a war. ॥14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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