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mahabharat 11.19.21: यद्यपि दु:सह ने प्राण त्याग दिए हैं, फिर भी वह अग्नि से प्रकाशित श्वेत पर्वत के समान सुवर्ण की माला और चमकते हुए कवच से सुशोभित दिखाई देता है ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 11.19: विकर्ण, दुर्मुख, चित्रसेन, विविंशति तथा दु:सहको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 19: विकर्ण, दुर्मुख, चित्रसेन, विविंशति तथा दु:सहको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  11.19.21 
शातकौम्या स्रजा भाति कवचेन च भास्वता।
अग्निनेव गिरि: श्वेतो गतासुरपि दु:सह:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि दु:सह ने प्राण त्याग दिए हैं, फिर भी वह अग्नि से प्रकाशित श्वेत पर्वत के समान सुवर्ण की माला और चमकते हुए कवच से सुशोभित दिखाई देता है ॥21॥
 
Even though Dusaha has lost his life, he still looks like a white mountain lit up with fire, adorned with a golden garland and a glittering armour. ॥21॥
 
इति श्रीमहाभारते स्त्रीपर्वणि स्त्रीविलापपर्वणि गान्धारीवाक्ये एकोनविंशोऽध्याय:॥ १९॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत स्त्रीपर्वके अन्तर्गत स्त्रीविलापपर्वमें गान्धारीवाक्यविषयक उन्नीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १९॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)