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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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अध्याय 19: विकर्ण, दुर्मुख, चित्रसेन, विविंशति तथा दु:सहको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप
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श्लोक 20
श्लोक
11.19.20
दु:सहस्यैतदाभाति शरीरं संवृतं शरै:।
गिरिरात्मगतै: फुल्लै: कर्णिकारैरिवाचित:॥ २०॥
अनुवाद
उस दुःसह का शरीर बाणों से भरा हुआ है और ऐसा सुन्दर प्रतीत हो रहा है जैसे कोई पर्वत उस पर खिले हुए कनेर के फूलों से ढका हुआ हो।
The body of that Duhsaha is filled with arrows and looks beautiful like a mountain covered with oleander flowers blooming on it.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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