श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 19: विकर्ण, दुर्मुख, चित्रसेन, विविंशति तथा दु:सहको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  11.19.18 
एनं हि पर्युपासन्ते बहुधा वरयोषित:।
क्रीडन्तमिव गन्धर्वं देवकन्या: सहस्रश:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
जैसे गन्धर्व के क्रीड़ा करते समय हजारों देवकन्याएँ उसके साथ रहती हैं, उसी प्रकार अनेक सुन्दर स्त्रियाँ इस विविंशति की सेवा करती थीं॥18॥
 
Just as thousands of celestial maidens accompany a Gandharva while he is playing, similarly many beautiful women used to serve this Vivinshati.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)