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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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अध्याय 19: विकर्ण, दुर्मुख, चित्रसेन, विविंशति तथा दु:सहको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप
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श्लोक 10
श्लोक
11.19.10
यस्याहवमुखे सौम्य स्थाता नैवोपपद्यते।
स कथं दुर्मुखोऽमित्रैर्हतो विबुधलोकजित्॥ १०॥
अनुवाद
सौम्य! जो युद्धस्थल में किसी के सामने भी अजेय थे, उन स्वर्गविजयी दुर्मुख को शत्रुओं ने किस प्रकार मार डाला?॥10॥
Saumya! How did the enemies kill Durmukh, the conqueror of the heavens, who was unstoppable in front of anyone in the battle field?॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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