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mahabharat 11.17.8: हे बलवान पुत्र! यदि तू युद्ध करते समय धर्म से मोहित न हो जाए, तो निश्चय ही देवताओं के समान शस्त्रों द्वारा जीते हुए लोकों को प्राप्त करेगा।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 11.17: दुर्योधन तथा उसके पास रोती हुई पुत्रवधूको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 17: दुर्योधन तथा उसके पास रोती हुई पुत्रवधूको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  11.17.8 
यथा च युध्यमानस्त्वं न वै मुह्यसि पुत्रक।
ध्रुवं शस्त्रजिताँल्लोकान् प्राप्स्यस्यमरवत् प्रभो॥ ८॥
 
 
अनुवाद
हे बलवान पुत्र! यदि तू युद्ध करते समय धर्म से मोहित न हो जाए, तो निश्चय ही देवताओं के समान शस्त्रों द्वारा जीते हुए लोकों को प्राप्त करेगा।॥8॥
 
'Son! Powerful son! If you do not get deluded by Dharma while fighting, then you will certainly attain the worlds conquered by weapons like the gods.' ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)