श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 17: दुर्योधन तथा उसके पास रोती हुई पुत्रवधूको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  11.17.5-6 
समीपस्थं हृषीकेशमिदं वचनमब्रवीत्।
उपस्थितेऽस्मिन् संग्रामे ज्ञातीनां संक्षये विभो॥ ५॥
मामयं प्राह वार्ष्णेय प्राञ्जलिर्नृपसत्तम:।
अस्मिन् ज्ञातिसमुद्धर्षे जयमम्बा ब्रवीतु मे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वह पास ही खड़े हुए श्रीकृष्ण से कहने लगी - 'वृष्णिनन्दन! प्रभु! जब भाई-बन्धुओं का नाश करने वाला यह घोर युद्ध आरम्भ हो गया था, उस समय यह महाबली राजा दुर्योधन हाथ जोड़कर मुझसे कहने लगा - 'माते! इस कुटुम्बियों के युद्ध में मेरी विजय के लिए कृपा कीजिए।' ॥5-6॥
 
She started speaking to Shri Krishna who was standing nearby - 'Vrishninandan! Prabhu! When this fierce battle that destroyed the brothers and relatives had come up, at that time this great king Duryodhan said to me with folded hands - 'Mother! In this battle between family members, please bless me for my victory.' ॥ 5-6॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd