श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 17: दुर्योधन तथा उसके पास रोती हुई पुत्रवधूको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  11.17.28 
पुत्रं रुधिरसंसिक्तमुपजिघ्रत्यनिन्दिता।
दुर्योधनं तु वामोरु: पाणिना परिमार्जती॥ २८॥
 
 
अनुवाद
सुन्दर जांघों वाली मेरी गुणवान पुत्रवधू कभी अपने पुत्र लक्ष्मण के रक्त से सने मुख को सूंघती है, तो कभी अपने हाथों से अपने पति दुर्योधन के शरीर को पोंछती है।
 
‘My virtuous daughter-in-law with beautiful thighs sometimes smells the blood-soaked face of her son Lakshman and at other times wipes the body of her husband Duryodhana with her hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)