अपश्यं कृष्ण पृथिवीं धार्तराष्ट्रानुशासिताम्।
पूर्णां हस्तिगवाश्वैश्च वार्ष्णेय न तु तच्चिरम्॥ २२॥
अनुवाद
हे वृष्णिपुत्र श्रीकृष्ण! मैंने दुर्योधन द्वारा शासित इस पृथ्वी को हाथी, घोड़े और गौओं से परिपूर्ण देखा था; परंतु वह राज्य अधिक समय तक नहीं टिक सका॥ 22॥
'O son of Vrishni, Sri Krishna! I had seen this earth ruled by Duryodhana, full of elephants, horses and cows; but that kingdom could not last long.॥ 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥