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श्लोक 11.17.15  |
यं पुरा व्यजनै रम्यैरुपवीजन्ति योषित:।
तमद्य पक्षव्यजनैरुपवीजन्ति पक्षिण:॥ १५॥ |
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| अनुवाद |
| पहले तो युवतियाँ उसके पास खड़ी होकर उसे पंखा झलती थीं, परन्तु आज पक्षी उसे अपने पंखों से पंखा झलते हैं॥15॥ |
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| 'In the past, young girls used to stand near him and fan him, but today the birds fan him with their wings.॥ 15॥ |
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