Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.17.12: वीर दुर्योधन ने निश्चय ही उस परमपद को प्राप्त कर लिया है, जो सबके लिए सुगम नहीं है; क्योंकि यह वीर पुरुष उसके द्वारा परोसे गए पलंग पर आगे की ओर मुख करके सो रहा है॥12॥ | mahabharat अध्याय 11.17: दुर्योधन तथा उसके पास रोती हुई पुत्रवधूको देखकर गान्धारीका श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ध्रुवं दुर्योधनो वीरो गतिं न सुलभां गत:।
तथा ह्यभिमुख: शेते शयने वीरसेविते॥ १२॥
अनुवाद
वीर दुर्योधन ने निश्चय ही उस परमपद को प्राप्त कर लिया है, जो सबके लिए सुगम नहीं है; क्योंकि यह वीर पुरुष उसके द्वारा परोसे गए पलंग पर आगे की ओर मुख करके सो रहा है॥12॥
'Valiant Duryodhana has certainly attained that supreme state, which is not easy for everyone; because this brave man is sleeping with his face forward on the bed served by him.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥