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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप
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श्लोक 53
श्लोक
11.16.53
बाहूरुचरणानन्यान् विशिखोन्मथितान् पृथक्।
संदधत्योऽसुखाविष्टा मूर्च्छन्त्येता: पुन: पुन:॥ ५३॥
अनुवाद
ये असहाय और व्यथित स्त्रियां बाणों से कटी हुई अपनी भुजाएं, जांघें और पैर जोड़ते समय बार-बार बेहोश हो जाती हैं।
‘These helpless and distressed women repeatedly faint while joining their arms, thighs and legs which have been severed by arrows.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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