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श्री महाभारत
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पर्व 11: स्त्री पर्व
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अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप
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श्लोक 38
श्लोक
11.16.38
बिभ्रत: कवचान्यन्ये विमलान्यायुधानि च।
न धर्षयन्ति क्रव्यादा जीवन्तीति जनार्दन॥ ३८॥
अनुवाद
जनार्दन! बहुत से योद्धा चमकते हुए कवच और अस्त्र-शस्त्र धारण किए हुए हैं, जिससे मांसाहारी पशु उन्हें जीवित समझकर आक्रमण न करें॥ 38॥
'Janardan! Many warriors are wearing shining armor and weapons, so that carnivorous animals do not attack them thinking they are alive.॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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