श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  11.16.37 
अपरे पुनरालिङ्गॺ गदा: परिघबाहव:।
शेरतेऽभिमुखा: शूरा दयिता इव योषित:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
तलवार के समान मोटी भुजाओं वाले अन्य वीर योद्धा प्रिय कुमारियों की भाँति अपनी गदाओं को गले लगाते हुए सामने सो रहे हैं।
 
'The other valiant warriors with arms as thick as the sword are sleeping in front, embracing their maces like beloved maidens.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)