श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  11.16.35 
बाणान् विनिशितान् पीतान् निस्त्रिंशान् विमला गदा:।
युद्धाभिमानिन: सर्वे जीवन्त इव बिभ्रति॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
ये सब अभिमानी योद्धा इस समय भी जीवित मनुष्यों के समान अपने हाथों में तीखे बाण, तीखी तलवारें और चमकती हुई गदाएँ धारण किए हुए हैं॥ 35॥
 
'All these proud warriors are, like living men, even at this time, holding sharp arrows, sharp swords and shining maces in their hands.॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)