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mahabharat 11.16.34: ‘उनके आभूषणों को गिद्ध, सियार, कौवे और भयंकर सियारियाँ बार-बार चिल्लाते हुए इधर-उधर फेंक रही हैं।॥ 34॥   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  11.16.34 
तेषामाभरणान्येते गृध्रगोमायुवायसा:।
आक्षिपन्ति शिवा घोरा विनदन्त्य: पुन: पुन:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
‘उनके आभूषणों को गिद्ध, सियार, कौवे और भयंकर सियारियाँ बार-बार चिल्लाते हुए इधर-उधर फेंक रही हैं।॥ 34॥
 
‘Their ornaments are thrown here and there by vultures, jackals, crows and terrible female jackals, screaming repeatedly.॥ 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)