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mahabharat 11.16.2: गांधारी अत्यंत पतिव्रता, अत्यंत सौभाग्यशाली, पति के समान व्रत रखने वाली, घोर तपस्या करने वाली तथा सदैव सत्य बोलने वाली थी॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 11.16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 16: वेदव्यासजीके वरदानसे दिव्य दृष्टिसम्पन्न हुई गान्धारीका युद्धस्थलमें मारे गये योद्धाओं तथा रोती हुई बहुओंको देखकर श्रीकृष्णके सम्मुख विलाप  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  11.16.2 
पतिव्रता महाभागा समानव्रतचारिणी।
उग्रेण तपसा युक्ता सततं सत्यवादिनी॥ २॥
 
 
अनुवाद
गांधारी अत्यंत पतिव्रता, अत्यंत सौभाग्यशाली, पति के समान व्रत रखने वाली, घोर तपस्या करने वाली तथा सदैव सत्य बोलने वाली थी॥ 2॥
 
Gandhari was very devoted to her husband, extremely fortunate, observed fasts like her husband, was engaged in severe austerities and always spoke the truth.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)