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श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  11.15.6 
राजपुत्रीं च पाञ्चालीमेकवस्त्रां रजस्वलाम्।
भवत्या विदितं सर्वमुक्तवान् यत् सुतस्तव॥ ६॥
 
 
अनुवाद
आप वह सब कुछ जानते हैं जो आपके पुत्र ने राजकुमारी द्रौपदी से कहा था, जो रजस्वला थीं और केवल एक वस्त्र पहने हुए थीं।
 
‘You know everything that your son said to Princess Draupadi, who was menstruating and wearing only one garment.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)