Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 11.15.37-38h: द्रौपदी बोली - आर्य! अभिमन्यु सहित आपके सभी पौत्र कहाँ चले गए? दीर्घकाल के पश्चात् आई हुई तपस्विनी देवी को देखकर वे आज आपके पास क्यों नहीं आ रहे? अब जब हम पुत्रहीन हो गए हैं, तो इस राज्य से हमारा क्या प्रयोजन?॥37 1/2॥ | mahabharat अध्याय 11.15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना । mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्रौपदी बोली - आर्य! अभिमन्यु सहित आपके सभी पौत्र कहाँ चले गए? दीर्घकाल के पश्चात् आई हुई तपस्विनी देवी को देखकर वे आज आपके पास क्यों नहीं आ रहे? अब जब हम पुत्रहीन हो गए हैं, तो इस राज्य से हमारा क्या प्रयोजन?॥37 1/2॥
Draupadi said - Arya! Where have all your grandsons, including Abhimanyu, gone? Why are they not coming to you today after seeing you, the ascetic goddess, who has come after a long time? What use do we have to this kingdom now that we are bereft of our sons?॥ 37 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥