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mahabharat 11.15.34-35h: वह अपने पुत्रों के साथ आँसू बहाते हुए बार-बार उनके शरीरों को देख रहा था। वे सभी शस्त्रों के प्रहार से घायल हो रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 11.15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना  »  श्लोक 34-35h
 
 
श्लोक  11.15.34-35h 
ततो बाष्पं समुत्सृज्य सह पुत्रैस्तदा पृथा॥ ३४॥
अपश्यदेतान् शस्त्रौघैर्बहुधा क्षतविक्षतान्।
 
 
अनुवाद
वह अपने पुत्रों के साथ आँसू बहाते हुए बार-बार उनके शरीरों को देख रहा था। वे सभी शस्त्रों के प्रहार से घायल हो रहे थे।
 
Along with his sons, shedding tears, he looked at their bodies again and again. All of them were being injured by the blows of weapons. 34 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)