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mahabharat 11.15.32-33h: फिर उनकी अनुमति लेकर सभी चौड़े सीने वाले पांडव एक साथ वीर माता कुंती के पास गए।   |   mahabharat अध्याय 11.15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 15: भीमसेनका गान्धारीको अपनी सफाई देते हुए उनसे क्षमा माँगना, युधिष्ठिरका अपना अपराध स्वीकार करना, गान्धारीके दृष्टिपातसे युधिष्ठिरके पैरोंके नखोंका काला पड़ जाना, अर्जुनका भयभीत होकर श्रीकृष्णके पीछे छिप जाना, पाण्डवोंका अपनी मातासे मिलना, द्रौपदीका विलाप, कुन्तीका आश्वासन तथा गान्धारीका उन दोनोंको धीरज बँधाना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  11.15.32-33h 
तया ते समनुज्ञाता मातरं वीरमातरम्॥ ३२॥
अभ्यगच्छन्त सहिता: पृथां पृथुलवक्षस:।
 
 
अनुवाद
फिर उनकी अनुमति लेकर सभी चौड़े सीने वाले पांडव एक साथ वीर माता कुंती के पास गए।
 
Then, taking his permission, all the broad-chested Pandavas went together to the brave mother Kunti.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)