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mahabharat 11.13.8: भरतनंदन! अपने आप को देखो। तुम्हारा आचरण सदैव न्याय के विरुद्ध रहा है। राजन! तुमने अपने मन को वश में नहीं रखा और सदैव दुर्योधन के वश में रहे।   |   mahabharat अध्याय 11.13: श्रीकृष्णका धृतराष्ट्रको फटकारकर उनका क्रोध शान्त करना और धृतराष्ट्रका पाण्डवोंको हृदयसे लगाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  11.13.8 
ततोऽन्यवृत्तमात्मानं समवेक्षस्व भारत।
राजंस्त्वं ह्यविधेयात्मा दुर्योधनवशे स्थित:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! अपने आप को देखो। तुम्हारा आचरण सदैव न्याय के विरुद्ध रहा है। राजन! तुमने अपने मन को वश में नहीं रखा और सदैव दुर्योधन के वश में रहे।
 
'Bharatanandan! Look at yourself. Your behavior has always been against justice. King! You have not controlled your mind and have always been under the control of Duryodhan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)