vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 11: स्त्री पर्व
»
अध्याय 13: श्रीकृष्णका धृतराष्ट्रको फटकारकर उनका क्रोध शान्त करना और धृतराष्ट्रका पाण्डवोंको हृदयसे लगाना
»
श्लोक 15
श्लोक
11.13.15
इदानीं त्वहमव्यग्रो गतमन्युर्गतज्वर:।
मध्यमं पाण्डवं वीरं द्रष्टुमिच्छामि माधव॥ १५॥
अनुवाद
माधव! अब मैं शान्त हूँ। मेरा क्रोध दूर हो गया है और मेरी चिंताएँ भी दूर हो गई हैं; इसलिए मैं मध्य पाण्डव योद्धा अर्जुन को देखना चाहता हूँ।
‘Madhava! I am calm now. My anger has gone and my worries have also gone; hence I want to see the middle Pandava warrior Arjun.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×