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mahabharat 11.13.15: माधव! अब मैं शान्त हूँ। मेरा क्रोध दूर हो गया है और मेरी चिंताएँ भी दूर हो गई हैं; इसलिए मैं मध्य पाण्डव योद्धा अर्जुन को देखना चाहता हूँ।   |   mahabharat अध्याय 11.13: श्रीकृष्णका धृतराष्ट्रको फटकारकर उनका क्रोध शान्त करना और धृतराष्ट्रका पाण्डवोंको हृदयसे लगाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  11.13.15 
इदानीं त्वहमव्यग्रो गतमन्युर्गतज्वर:।
मध्यमं पाण्डवं वीरं द्रष्टुमिच्छामि माधव॥ १५॥
 
 
अनुवाद
माधव! अब मैं शान्त हूँ। मेरा क्रोध दूर हो गया है और मेरी चिंताएँ भी दूर हो गई हैं; इसलिए मैं मध्य पाण्डव योद्धा अर्जुन को देखना चाहता हूँ।
 
‘Madhava! I am calm now. My anger has gone and my worries have also gone; hence I want to see the middle Pandava warrior Arjun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)