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mahabharat 11.12.13: भरतनन्दन! धर्मराज को गले लगाकर उन्हें सान्त्वना देते हुए धृतराष्ट्र भीमसेन को इस प्रकार खोजने लगे मानो उन्हें अग्नि के समान जला देना चाहते हों। उस समय उनके मन में दुर्भावना उत्पन्न हो गई थी॥13॥   |   mahabharat अध्याय 11.12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  11.12.13 
धर्मराजं परिष्वज्य सान्त्वयित्वा च भारत।
दुष्टात्मा भीममन्वैच्छद् दिधक्षुरिव पावक:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भरतनन्दन! धर्मराज को गले लगाकर उन्हें सान्त्वना देते हुए धृतराष्ट्र भीमसेन को इस प्रकार खोजने लगे मानो उन्हें अग्नि के समान जला देना चाहते हों। उस समय उनके मन में दुर्भावना उत्पन्न हो गई थी॥13॥
 
Bharatanandan! Embracing Dharmaraja and consoling him, Dhritarashtra started searching for Bhima as if he wanted to burn him like fire. At that time, ill-will had arisen in his mind.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)