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mahabharat 11.12.10: धर्मराज महाबाहु युधिष्ठिर ने कुररियों के समान विलाप करती हुई स्त्रियों के घेरे को पार करके अपने चाचा धृतराष्ट्र को प्रणाम किया॥10॥   |   mahabharat अध्याय 11.12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 12: पाण्डवोंका धृतराष्ट्रसे मिलना, धृतराष्ट्रके द्वारा भीमकी लोहमयी प्रतिमाका भंग होना और शोक करनेपर श्रीकृष्णका उन्हें समझाना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  11.12.10 
अतीत्य ता महाबाहु: क्रोशन्ती: कुररीरिव।
ववन्दे पितरं ज्येष्ठं धर्मराजो युधिष्ठिर:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
धर्मराज महाबाहु युधिष्ठिर ने कुररियों के समान विलाप करती हुई स्त्रियों के घेरे को पार करके अपने चाचा धृतराष्ट्र को प्रणाम किया॥10॥
 
Dharmaraja Mahabahu Yudhishthira crossed the circle of women wailing like Kurris and bowed down to his uncle Dhritarashtra.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)