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mahabharat 11.1.41: ‘आपके सभी पुत्र उस प्रज्वलित अग्नि में पतंगों के समान गिर पड़े हैं। जो पुत्र बाणों की अग्नि में भस्म हो गए हैं, उनके लिए आपको शोक नहीं करना चाहिए।॥41॥   |   mahabharat अध्याय 11.1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  11.1.41 
तस्मिन् समिद्धे पतिता: शलभा इव ते सुता:।
तान् वै शराग्निनिर्दग्धान्न त्वं शोचितुमर्हसि॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
‘आपके सभी पुत्र उस प्रज्वलित अग्नि में पतंगों के समान गिर पड़े हैं। जो पुत्र बाणों की अग्नि में भस्म हो गए हैं, उनके लिए आपको शोक नहीं करना चाहिए।॥41॥
 
‘All your sons have fallen like moths in that blazing fire. You should not grieve for those sons who have been burnt to ashes in the fire of arrows.॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)