श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  11.1.39 
स्वयमुत्पादयित्वाग्निं वस्त्रेण परिवेष्टयन्।
दह्यमानो मनस्तापं भजते न स पण्डित:॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
जो व्यक्ति स्वयं आग जलाकर अपने आप को कपड़े में लपेट लेता है और जलने पर पीड़ा महसूस करता है, उसे बुद्धिमान नहीं कहा जा सकता।
 
'A person who lights a fire himself and wraps himself in a cloth and feels anguish when he gets burnt cannot be called intelligent.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)