श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  11.1.35 
आदावेव मनुष्येण वर्तितव्यं यथाक्षमम्।
यथा नातीतमर्थं वै पश्चात्तापेन युज्यते॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य को प्रारम्भ से ही उचित आचरण करना चाहिए, जिससे उसे बाद में अतीत के लिए पश्चाताप न करना पड़े॥ 35॥
 
‘A man must behave appropriately from the beginning, so that he need not repent for the past later.॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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