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श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  11.1.34 
मध्यस्थो हि त्वमप्यासीर्न क्षमं किञ्चिदुक्तवान्।
दुर्धरेण त्वया भारस्तुलया न समं धृत:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
आप भी मध्यस्थ बनकर बैठे रहे और उसे कोई उचित सलाह नहीं दी। आप एक प्रचंड योद्धा थे - आपकी बात कोई टाल नहीं सकता था, फिर भी आपने दोनों पक्षों का भार तराजू पर समान रूप से नहीं तौला।
 
‘You too sat as a mediator and did not give him any proper advice. You were a fierce warrior – no one could avoid your words, yet you did not weigh the burden of both sides equally on the scale.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)