मध्यस्थो हि त्वमप्यासीर्न क्षमं किञ्चिदुक्तवान्।
दुर्धरेण त्वया भारस्तुलया न समं धृत:॥ ३४॥
अनुवाद
आप भी मध्यस्थ बनकर बैठे रहे और उसे कोई उचित सलाह नहीं दी। आप एक प्रचंड योद्धा थे - आपकी बात कोई टाल नहीं सकता था, फिर भी आपने दोनों पक्षों का भार तराजू पर समान रूप से नहीं तौला।
‘You too sat as a mediator and did not give him any proper advice. You were a fierce warrior – no one could avoid your words, yet you did not weigh the burden of both sides equally on the scale.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥