श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  11.1.16-17h 
दु:शासनवधं श्रुत्वा कर्णस्य च विपर्ययम्॥ १६॥
द्रोणसूर्योपरागं च हृदयं मे विदीर्यते।
 
 
अनुवाद
दु:शासन मारा गया है, कर्ण नष्ट हो गया है और द्रोणरूपी सूर्य को भी ग्रहण लग गया है; यह सब सुनकर मेरा हृदय विदीर्ण हो रहा है ॥16 1/2॥
 
Dushasan has been killed, Karna has been destroyed and even the sun in the form of Drona has been eclipsed; my heart is breaking on hearing all this. ॥16 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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