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mahabharat 11.1.15-16h: हाय! अब मैं भीष्म के धर्मयुक्त वचन नहीं सुन सकूँगा। दुर्योधन के बैल के समान गरजने वाले वीरतापूर्ण वचन अब मेरे कानों तक नहीं पहुँचेंगे।   |   mahabharat अध्याय 11.1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना   ।   mahabharat पर्व 11: स्त्री पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 11: स्त्री पर्व  »  अध्याय 1: धृतराष्ट्रका विलाप और संजयका उनको सान्त्वना देना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  11.1.15-16h 
न हि श्रोतास्मि भीष्मस्य धर्मयुक्तं प्रभाषितम्॥ १५॥
दुर्योधनस्य च तथा वृषभस्येव नर्दत:।
 
 
अनुवाद
हाय! अब मैं भीष्म के धर्मयुक्त वचन नहीं सुन सकूँगा। दुर्योधन के बैल के समान गरजने वाले वीरतापूर्ण वचन अब मेरे कानों तक नहीं पहुँचेंगे।
 
Alas! Now I will not be able to listen to Bhishma's righteous words. The heroic words of Duryodhan roaring like a bull will no longer reach my ears. 15 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)