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श्री महाभारत
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पर्व 10: सौप्तिक पर्व
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अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना
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श्लोक 60
श्लोक
10.9.60
इत्येवं द्रोणपुत्रस्य निशम्य करुणां गिरम्।
प्रत्यूषकाले शोकार्त: प्राद्रवन्नगरं प्रति॥ ६०॥
अनुवाद
द्रोणपुत्र के मुख से ऐसा दयनीय समाचार सुनकर मैं शोक से भर गया और प्रातःकाल मैं नगर की ओर दौड़ा।
Having heard such pitiable news from the mouth of the son of Drona, I was filled with grief and in the morning I rushed towards the city.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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