श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 38-39h
 
 
श्लोक  10.9.38-39h 
कुतश्चापीदृशं पापा: प्रवर्तिष्यामहे वयम्॥ ३८॥
यादृशेन पुरस्कृत्य त्वं गत: सर्वपार्थिवान्।
 
 
अनुवाद
महाराज! जिस भावना से आप सब राजाओं को आगे बढ़ाते हुए स्वर्ग जा रहे हैं, वैसी भावना हम पापी लोग कहाँ से ला सकेंगे?॥38 1/2॥
 
Maharaj! The feeling with which you are going to heaven leading all the kings ahead, from where will we sinners be able to bring such feeling?॥ 38 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)