श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  10.9.35-36h 
दातारं सर्वकामानां रक्षितारं प्रजाहितम्॥ ३५॥
यद् वयं नानुगच्छाम त्वां धिगस्मान् नराधमान्।
 
 
अनुवाद
आप हमें हमारी सभी इच्छित वस्तुएँ देते रहे हैं और हमारी प्रजा का कल्याण करते रहे हैं। फिर भी हम आपका अनुसरण नहीं कर रहे हैं, इसमें हम जैसे अभागे मनुष्यों को धिक्कार है!॥35 1/2॥
 
‘You have been giving us all the things we desire and protecting the welfare of our subjects. Even then we are not following you, shame on wretched people like us for this!॥ 35 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)