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श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 32-33h
 
 
श्लोक  10.9.32-33h 
धन्यस्त्वमसि गान्धारे यस्त्वमायोधने हत:॥ ३२॥
प्रायशोऽभिमुख: शत्रून् धर्मेण पुरुषर्षभ।
 
 
अनुवाद
हे गांधारीपुत्र महापुरुष! आप धन्य हैं, क्योंकि आप युद्ध में धर्मपूर्वक शत्रुओं का सामना करते हुए अनेक बार मारे गए हैं।
 
O great man, son of Gandhari! You are blessed, because you have often been killed in battle while facing the enemies in a righteous manner. 32 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)