श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 9: दुर्योधनकी दशा देखकर कृपाचार्य और अश्वत्थामाका विलाप तथा उनके मुखसे पांचालोंके वधका वृत्तान्त जानकर दुर्योधनका प्रसन्न होकर प्राणत्याग करना  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  10.9.30-31h 
भिक्षुकौ विचरिष्येते शोचन्तौ पृथिवीमिमाम्।
धिगस्तु कृष्णं वार्ष्णेयमर्जुनं चापि दुर्मतिम्॥ ३०॥
धर्मज्ञमानिनौ यौ त्वां वध्यमानमुपेक्षताम्।
 
 
अनुवाद
अब वे बेचारे दुःखी होकर भिखारी होकर इस पृथ्वी पर भिक्षा मांगते फिरेंगे। धिक्कार है उन वृष्णिवंशी श्रीकृष्ण और कुबुद्धि अर्जुन को, जिन्होंने अपने को धर्मज्ञ समझकर भी तुम्हारे इस अन्यायपूर्ण वध को अनदेखा कर दिया।
 
‘Now those poor souls will be beggars in grief and will roam around begging on this earth. Shame on that Vrishnivanshi Shri Krishna and Arjuna of wrong intellect, who despite thinking themselves to be wise in Dharma, ignored your unjust killing. 30 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)