श्लाघते त्वां हि वार्ष्णेयो राजसंसत्सु भारत।
स शिष्यो मम कौरव्यो गदायुद्ध इति प्रभो॥ २७॥
अनुवाद
प्रभु! भरतपुत्र! वृष्णिवंश के रत्न बलरामजी राजाओं की सभा में सदैव आपकी स्तुति करते थे और कहते थे कि 'कुरुराज दुर्योधन गदायुद्ध में मेरा शिष्य है।'
Prabhu! Bharata's son! Balarama, the jewel of the Vrishni clan, always used to praise you in the assembly of kings and used to say that 'Kuru king Duryodhana is my disciple in mace fighting.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥